Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
Administrator

व्हाट्स अप संदेश

 

लघु कथा 

व्हाट्स अप संदेश


विवेक रंजन श्रीवास्तव


रात के दस बजे रामनाथ जी सोने ही जा रहे थे कि , मोबाइल पर व्हाट्सऐप संदेश आया।


पिताजी, आपकी बहुत याद आ रही है।


रामनाथ जी के चेहरे पर बरसों बाद मुस्कान आई। काँपती उँगलियों से उन्होंने लिखा,

मुझे भी बेटा।


कुछ देर बाद दूसरा संदेश आया,


पिंकी की सगाई तय हो गई है। आपको लेने आऊँगा।


रामनाथ जी की आँखों में चमक आ गई।उन्होंने सोचा, बहुत दिनों बाद घर जाऊँगा।


तभी बेटे का अगला व्हाट्स अप मैसेज आया,


सुबह 11 बजे तैयार रहियेगा , रिश्तेदार दूर-दूर से आ रहे हैं,

सब पूछेंगे कि पिताजी कहाँ हैं? इसलिए आप रहेंगे तो अच्छा रहेगा।


रामनाथ जी देर तक मोबाइल देखते रहे।

फिर उसे स्विच ऑफ कर तख्त पर लेट गए ।

 


कंक्रीट  का जाल

(डॉ मंजु गुप्ता)

स्वार्थी मानव  ने भू पर , सिमेंट का है जाल बिछाया।


विलुप्त होती हैं चिड़िया , संकट दुनिया पर गहराया।।


संवेदन विहीन मानव , भौतिक सुख हेतु वन उजाड़े।


दूषित पर्यावरण हुआ ,  ग्लोबल वार्मिंग अब  दहाड़े।।


 


Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY
हर उत्सव के अवसर पर उपयुक्त रचनाएँ