कहानी पाठ
(व्यंग्यात्मक लघुकथा)
विवेक रंजन श्रीवास्तव
सभागार में महिला समिति द्वारा आयोजित कहानी पाठ चल रहा था। वरिष्ठ कथाकार आमंत्रित किए गए थे। वे अपनी एक गंभीर कहानी सुना रहे थे। कहानी में संवेदनाएँ थीं, संघर्ष था और जीवन की विडंबनाएँ थीं। कथाकार हर वाक्य के साथ श्रोताओं के चेहरों पर प्रतिक्रिया तलाश रहे थे।
पहली पंक्ति में एक देवी जी आँखें मूँदे बैठी थी । सिर का रह रहकर झुकना बता रहा था कि कहानी का प्रभाव गहरा हुआ है। वे नींद की दुनिया में कहानी का अपना संस्करण रच रही थी। बगल में आयोजक मंडली की दो महिलाएँ आपसी बातचीत में व्यस्त थीं। शायद उन्हें इस कहानी से अधिक उनकी अपनी कहानी में रुचि थी, वे अगले आयोजन पर गम्भीर चर्चा कर रही थी, और इस आयोजन के प्रेस कवरेज की चिंता में थीं।
कुछ लोग मोबाइल पर कहानी रिकॉर्ड कर रहे थे। एक महिला कैमरे का कोण बार बार बदल रही थीं। वे कहानी सुनने से अधिक यह सुनिश्चित करने में व्यस्त थीं कि कहानी का कोई दृश्य रिकॉर्ड होने से छूट न जाए। शायद घर जाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करना था। कहानी का लाइव आनंद लेने से ज्यादा जरूरी था, उसके आयोजन में अपनी उपस्थिति का सोशल मीडिया पर सदैव बना रहने वाला प्रमाण सुरक्षित रखना।
कथाकार ने कहानी का सबसे मार्मिक अंश पढ़ा। " पिता बेटी की शादी के लिए अपना घर बेच देता है।" उनकी आवाज भर्रा गई। उन्होंने श्रोताओं की ओर देखा। मोबाइल की कुछ स्क्रीन चमक रही थी,और कुछ चेहरे निर्विकार थे।
कहानी समाप्त हुई। तालियाँ बजीं। प्रश्नोत्तर का दौर शुरू हुआ।
एक महिला ने कहा, बहुत सुंदर कहानी थी। कथाकार ने उत्साहित होकर पूछा, आपको कौन सा प्रसंग अच्छा लगा?
महिला बोलीं, पूरी रिकॉर्डिं घर जाकर सुनूँगी।
एक सज्जन ने कहा, मैंने पूरा वीडियो बना लिया है। फेसबुक पर डालूँगा। आप को टैग कर दूंगा।
तभी एक युवा ने पूछा, सर, कहानी का शीर्षक क्या था?
कथाकार कुछ क्षण चुप रहे। फिर मुस्कराए। वे समझ गए कि वो कहानी सुना रहे थे, जबकि सभागार में हर व्यक्ति अपनी अपनी कहानी जी रहा था।
घर लौटकर उन्होंने डायरी खोली। नई कहानी का शीर्षक लिखा, कहानी पाठ।
पहली पंक्ति लिखी, एक सभागार में कहानी सुनाई जा रही थी। कहानीकार को भ्रम था कि वह कहानी सुना रहा है, ...दरअसल, हम सभी किसी न किसी कहानी के किरदार हैं। फर्क इतना है कि कुछ अपनी भूमिका जानते हैं, कुछ निभा रहे हैं और कुछ को पता ही नहीं कि वे भी किसी की कहानी का हिस्सा बन चुके हैं।
तभी मोबाइल पर सूचना आई। एक श्रोता ने उनकी कहानी का वीडियो पोस्ट किया था। कैप्शन था, आज एक अद्भुत कहानी पाठ का आनंद लिया।
कथाकार मुस्कराए। कहानी समझने और आनंद लेने वाले भले ही न मिले हों, प्रचारक तो मिल गए थे!
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