एक भिखारी दूजे से
मांग रहा हैं दान !!
एक बहरा दूजे के
उमेठ रहा हैं कान !!
अँधा दूजे से कहे
जीवन रंग पहचान !!
लंगड़ा किसी को ललकारे
दौड़ नहीं आसान !!
गूंगा दूजे को धमकाएं
खींच लूंगा जुबान !!
एक लावारिस लेने चला
गोद सारे धनवान !!
गूंगो की गवाही से
फट गया आसमान !!
अन्धो के रोने से
नजर हुई हलकान !!
लंगड़ों की मारामारी से
सब रह गए हैरान !!
तू भी हैरान मै भी परेशान
ऐसा है मेरा भारत महान !!
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विश्वनाथ शिरढोणकर
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