जीवन जीने के आधे अधूरे
चिन्ह और प्रश्नचिन्ह
हश्र के विश्लेषण के लिए
सम्हाल कर रखे है !!
मै आकर खड़ा हो गया हूँ
भीड़ में
जहाँ बहुत सारे लोग
खुद को आजाद कराने की
कोशिश कर रहे है !!!
कुछ लोग
चाँद - सूरज की रोशनी
मुट्ठी में लिए
सभी को तडफा रहे है
कुछ लोग
धरती को कैद किये है
और आसमान पर
कब्जा करने की
कोशिश कर रहे है !!
सूरज की किरणो से
नयी ऊर्जा के लिये
कुछ लोग
नंगे बदन कंप रहे है !!
सरकारी अमले के लोग
अमन और चैन के लिए
चाँद - सूरज की किरणें
आधार कार्ड पर बाट रहे है !!
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विश्वनाथ शिरढोणकर
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