Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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जीवन

 

जीवन


मै जो हूं, जैसा हूं, हर हाल में अच्छा हूं ।
उम्र के इस पड़ाव में, अभी बच्चा हूं ।।
मत करो शिकवा, ना दो, इल्ज़ाम मुझे ।
मैं मन, वचन, कर्म से, अभी सच्चा हूं ।।
काप रहे है पग मेरे, जीवन की मेढ़ पर ।
थाम लो हाथ मेरा, अभी मै कच्चा हूं ।।

• विशाल शुक्ल
पातालेश्वर मार्ग, 
छिंदवाड़ा (मध्यप्रदेश)

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