तेरा ख्वाब आज मुझे...............यूँ मुक्क्मल कर गया
तेरे तसव्वुर मे जाना..............मै पूरी गज़ल कर गया
हिज़्र की रातें हमने हाये..............कुछ इस तरह काटी
देखा मुड़ के कि खड़ी.........शायरी की फ़सल कर गया
दुश्मनों ने तो ज़ोर.......पूरा लगाया था, था........मगर
तेरा ख्याल मुझ पे..........अल्लाह का फज़ल कर गया
अजनबियों ने भी सुने थे.......... इस कदर किस्से मेरे
जो आया मेरी गली....वो संभल संभल संभल कर गया
कुछ तो बात ख़ास थी...........तेरे उस दोस्त में विपुल
उसको तेरे साथ देख ... जो ज़माना ये जल कर गया.......विपुल त्रिपाठी
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