सरकारी पुरस्कारों से डरता हूँ
ये मोहब्बत कभी यूँ ही नही होती
इक तेरी बेवफ़ाई छोड दे तो
ये इनायत कभी यूँ नही होती
बन्दगी का सबब कुछ तो होगा
यहाँ इबादत कभी यूँ ही होती
हर पहलू पे बात होने लगी है
ये कवायद कभी यूँ नही होती
ख़ुद आगे हो के सलाम किया
ये नेकनियत कभी यूँ ही नही होती
वो हमसे मिलें और मुस्कुरा के मिलें
ये शराफ़त कभी यूँ ही नही होती..........विपुल त्रिपाठी
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