नयन भरकर
विनोद कुमार सीताराम दुबे
जबसे आई है बिटिया
घर जगमगा उठा है
अंधेरे दूर हो गये है
प्रकाश छा गया है
दुख दर्द की बेड़ियां
हट गई है आज घर से
बड़ी हो गई है बिटिया
हर काम में हाथ बंटाती
छोटे भाई रीषभ का
विशेष ध्यान देती बिटिया
भोजन में हाथ बंटाती
मंमी पापा का ख्याल रखती
समय-समय पर दवा देती
भाई को पहले भोजन देती
हंस-हंसकर कर कहती
रक्षाबंधन पर सताऊंगी
मुंह भरकर मिठाई खिलाऊंगी
एक दिन ससुराल जाऊंगी
मंमी पापा सहित भाई बहन
खुशी के के आंसू बहाएंगे
बिटिया भी नयन भरकर
सब की याद लिए जाएगी
पूरे परिवार को बिटिया की
बहुत याद आएगी
बहुत याद आएगी
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