किसान की सान
हे हलधर तूं अति महान
बैलों संग हल लेकर के
धूप छांव में करके संघर्ष
धरती को चीर चीर कर
उत्तम उपजाऊ भूमि बना
जीवन उपयोगी अनाज का
उत्पादन करते प्यारे किसान
जन-जन के कल्याण हेतु
वह खेतों में पहरा देता है
शरदी गर्मी और वर्षा में
खेतों में निष्ठा से लगा रहता है
लहलहाते खेत देखकर
वह फूला नहीं समाता है
घर की परवाह नहीं करता
वह खेत-खलिहान में लगकर
अनमोल अनाज उपजाता है
घर-परिवार के साथ रहकर
सदैव खेत का खयाल रखता है
खेत की मुस्कान किसान की सान है
विनोद कुमार सीताराम दुबे
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