Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
Administrator

जीते जी श्राद्ध

 

जीते जी श्राद्ध

विनोद कुमार सीताराम दुबे


आने वाली पीढ़ियां 

मात-पिता से दूरियां 

बनाते जा रही है 

अपने मशीनी जीवन में 

युवा पीढ़ी व्यस्त है 

समय की पाबंदी में 

सब बध गये है मित्रों 

अपने-अपने चक्कर में 

सब पड़े हुए हैं 

अपने संस्कार से हट 

पश्चिमी संस्कार की ओर 

आकृष्ट हो रहे हैं 

बुजुर्ग माता-पिता को 

घर-द्वार से दूर 

वृद्धा आश्रम ले जा रहे हैं 

फिर श्राद्ध क्या करेंगे 

इसलिए हम बुजुर्गों को 

जीते जी श्राद्ध कर लेना चाहिए 





Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY
हर उत्सव के अवसर पर उपयुक्त रचनाएँ