जीते जी श्राद्ध
विनोद कुमार सीताराम दुबे
आने वाली पीढ़ियां
मात-पिता से दूरियां
बनाते जा रही है
अपने मशीनी जीवन में
युवा पीढ़ी व्यस्त है
समय की पाबंदी में
सब बध गये है मित्रों
अपने-अपने चक्कर में
सब पड़े हुए हैं
अपने संस्कार से हट
पश्चिमी संस्कार की ओर
आकृष्ट हो रहे हैं
बुजुर्ग माता-पिता को
घर-द्वार से दूर
वृद्धा आश्रम ले जा रहे हैं
फिर श्राद्ध क्या करेंगे
इसलिए हम बुजुर्गों को
जीते जी श्राद्ध कर लेना चाहिए
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