किसान मर रहे हैं बचा लो तो मान लूँ.
आतंक से भारत को बचा लो तो मान लूँ.
मैं जानता हूँ संस्कृति के रहनुमा हो तुम,
औरत की आबरु को बचा लो तो मान लूँ.
बनवा रहे हो मन्दिरें ग़ैरों के मुल्क में,
ग़र राम के मन्दिर को बना दो मान लूँ.
व्यक्तित्व से सारे जहाँ को जीत लिया है,
अब पाक पे जादू को चला दो तो मान लूँ.
हिंदी से सारे विश्व को अवगत करा रहे,
भाषा जो राष्ट्र की है बता दो तो मान लूँ.
-विनोद गोरखपुरी 'निर्भय'
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