खाली लोग खालीपन से भरे हुए हैं
पता नहीं ज़िंदा है कि मरे हुए हैं
मेरे ईसा पहचान में नहीं आते
शहर में सभी लोग सूली चढ़े हुए हैं
संवेदनाओं की वेदनाएं समझ नहीं पाते
जाने किस माहौल में बच्चे बड़े हुए हैं
जो लम्हे कभी दिल दुखाते थे
मेरी ग़ज़लों में नगीनों से जड़े हुए हैं
बेटी सयानी हो गई है उम्र की दहलीज पर
कैसे बाप है जो पीकर पड़े हुए हैं
करेलों ने अपनी औकात दिखा दी
देखो तो नीम पर चढ़े हुए हैं
विनोद कुमार दवे
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