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बिलकुल सच, दिल से कहा है
बेहद-बेशक़ इश्क़ है, उनसे मेरा
प्यार करता हूँ, बे-तहाशा उन्हें
रहता हूँ मैं सच, बेतक़ल्लुफ़
मौज़ूदगी में, उनकी सदा
आग़ाज़-ए-इश्क़, उन्ही से मेरा
दरमियां-ए-इश्क़, उन्ही से मेरा
अंजाम-ए-इश्क़ भी, उन्ही से मेरा
बाक़ी दिल में जो भी, बचा गया है
बख़ुदा वो सब भी, उन्ही से मेरा
हाथ थाम कर उनका मैं, मन में,
कलमा-ए-इश्क़, दोहराता रहा
गुनगुनाता रहा, इश्क़ में ऐसे
जिस तरह भंवरा, कलि से
बेख़ौफ़ इश्क़, फरमाता रहा
साथ जब भी, हम दो हैं होते
दिल ज़ोरों से, धड़कता है मेरा
इससे मुकम्मल, इश्क़ क्या होगा ?
पेट दुखता है, हंस-हंस कर
वजूद तरो-ताज़ा, हो जाता है मेरा
आवाज़ उनकी, अब ना सुनूं तो
'निर्जन' दिन मेरा, ढ़लता नही
उनसे है, रूह्दारी, इश्क़िया ख़ुमारी
बेक़रारी, कलमकारी की बीमारी
उनके बिन, जीवन मेरा चलता नहीं
--- तुषार राज रस्तोगी ---
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