"आखिर...
मैं भी कितना नादान था...
वेवजह...
तेरे प्यार में परेशान था...
तुझे रास आती होगी वेवफ़ाई..
इस बात से...
जाने क्यूँ आज तक अनजान था..!!!
खुद को बेचने के लिए...
तैयार भी हूँ ऐ बेवफ़ा!!!...
बस शर्त यह है कि...
खरीददार भी तू ही हो..."
-ठाकुर दीपक सिंह कवि
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