चुरा-चुरा कर कोशिकाएँ
बना लेंगे दोनों दल
एक-दूसरे के प्रतिरूप।
दोनों तरफ अर्जुन होंगे
दोनों तरफ कृष्ण।
दोनों तरफ दुर्योधन होंगे
दोनों तरफ भीष्म।
होगा सामना कृष्ण से कृष्ण का
लड़ रहे होंगे
अर्जुन से अर्जुन
भीष्म से भीष्म
द्रौण से द्रौण।
जूझ रहा होगा भीम,भीम से
दुर्योधन,दुर्योधन से।
हर योद्धा के सपने
खड़ा होगा उसका प्रतिरूप।
यह महाभारत
नहीं होगा अठारह दिनों में समाप्त।
अठारह के आगे
कई शून्य होंगे
अनगिनत शून्य।
बिलकुल अनूठा होगा
यह अनंत महाभारत।
ठाकुर दास 'सिद्ध'
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