माँ तो आखिर माँ होती है
म्ेारे जगने से पहले जगती है
म्ेारे सोने के बाद सोती है
जीवन दिया हमको उसने
यह अदभुत धरा होती है
दुखों की कड़ी घूप में
ठण्डी सी बौछार होती है
माँ तो आखिर माँ होती है
दुनियां की गरमाहट मैया
चन्द्र सी षीतल होती है
थोड़ी सी मुसीबत पड़ने पर
दीवार सी खड़ी होती है
कितने दुःख पहुँचाए बच्चा
माँ के ह्रदय में दया होती है
सबसे जुदा सबसे अलग
हर दिखाबे से ऊपर होती है
माँ तो आखिर माँ होती है
बच्चे के लिए हर खतरा झेले
बिन माँ हम मेले में अकेले
रिष्तों के इस भरे जहां में
अपने गम भुला कर सारे
हमारी खुषियों मे खुष होती है
हर सवाल का हल होता है
प्रभु की ऐसी अदभुत रचना
षब्दों में न वयां होती है
माँ तो आखिर माँ होती है
सुषमा देवी
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