आपका हल्का सा इक इशारा बहोत है
डूबती कश्ती को कोई किनारा बहोत है
इक हमीं हैं जो आपको अब तक नहीं भूले
वरना इश्क होने का मौका दोबारा बहोत है
आज हम डूब रहे हैं कोई आयेगा बचाने
कभी हमने भी कई जान को उबारा बहोत है
देखने वाले तो कहेंगे जो देखेंगे आँखों में
कौन देखेगा मेरा दिल जो बेचारा बहोत है
इक आपका ही दिल है जो हमें जाना नहीं
लोगों के दिलों में "साँझ" प्यारा बहोत है
सुनील मिश्रा "साँझ"
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