सुशील शर्मा
तुम मुझे बहुत पुराने लगते हो।
धूर्त चालक किन्तु सयाने लगते हो।
हो बहुत होंशियार
करते हो प्यार
न जाने क्यों अफसाने से लगते हो।
तुम्हारी बातें दिमाग खाती हैं।
कान में कुछ फुसफुसाती हैं।
बेकार सी होती हैं
आपा खोती हैं।
रात को सपनों में डराती हैं।
जोर जोर से आज बोली पत्नी।
क्यों जी बना दूँ आपकी चटनी
मैने किया मना
खाना ही नही बना
मना रहा हूँ मैं खैर अपनी।
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