सुशील शर्मा
मेरे होंसले से सभी दंग हैं।
दूर वाले भी आज संग हैं।
मौत पास से निकल जाती है।
देख कर मेरे जीने का ढंग है।
खालिश बेदाग तेरी चूनर है।
पास मेरे प्यार का सतरंग है।
दुश्मन तो सारे सफा हो गए।
अपनों से बांकी अब जंग है।
सूरज को जीतने निकला हूँ मैं।
भले ही रोशनी से हाथ तंग हैं।
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