(तीन पदी 12,10,12 मात्राएँ)
सुशील शर्मा
सरल सहज सुन्दर सरस
सुखद सहस सानंद
फूल सा बीता बरस।
दूर रह कर भी पास
अद्भुत है ये प्यार
तुम्हारा ही अहसास।
मन का तुमसे नाता
जब देखो तब ही
तुम्हारा साथ भाता।
तुम पर स्नेह लुटाऊँ
तेरी यादों में
आंसू न रोक पाऊं।
दूर न मैं कर पाया
तुमको इस मन से
तुमने बहुत सताया।
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