सुशील कुमार शर्मा
मन का क्रोध
अच्छी स्मृतियाँ लोप
स्वयं का दुःख।
क्रोध का बैरी
विनय निरुत्तर
पिघले क्रोध।
क्रोध की काट
कोई अस्त्र न शस्त्र
मौन का मन्त्र।
क्रोध उपजे
बुद्धि विवेक भ्रांत
मस्तिष्क बंद।
कम विवेक
मानव बना दैत्य
क्रोध है पाप
क्रोध है अग्नि
अच्छाई का हवन
भस्म जीवन
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