सुशील शर्मा
इंतजार उनका किया बीते दिन और रात।
नैना रास्ता देख कर अश्रु करें बरसात।
एक हतो हरि संग गयो अब बेमन हम लोग।
पल पल छिन छिन मर जियें कैसे कटे वियोग।
राधा ऐसी बावरी कान्हा प्रीत लगाय
वृंदावन के बीच में कान्हा कान्हा गाय।
ऊधो कान्हा से कहो क्यों बिसरायो मोय।
जन्म जन्म को बावरो जो मन टेरे तोय।
जान द्वारका तुम बसे छोड़ बिरज के ग्वाल।
अब तो दरस दिखाइयो जो मन करत बबाल।
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