मत पूजो नवरात्रों में उस बच्ची को..
जिसे दुनिया में आने से रोक रहे हो..
आ गयी तो नित नए दुखों में झोंक रहे हो..
मत पूजो नवरात्रों में उस बच्ची को.
जिसपर घर की इज्ज़त का बोझ डाल रहे हो..
जिसे पराया समझके पाल रहे हो..
मत पूजो नवरात्रों में उस बच्ची को.
जिसके पंख उड़ने से पहले ही काट रहे हो..
जिसे रिश्तों की तश्तरियों में बाँट रहे हो..
मत पूजो नवरात्रों में उस बच्ची को.
जिसे दहेज़ की आग में जला रहे हो..
अस्मत लुट जिसका अस्तित्व मिटा रहे हो..
मत पूजो नवरात्रों में उस बच्ची को.
इन्सान समझो उसे पत्थर की देवी मत बनाओ
इज्ज़त करो नारी की चाहे पूजा पाठ का ढोंग मत रचाओ!
सुनीता स्वामी
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