Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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"स्व-प्रकाश"

 
"स्व-प्रकाश"

ना मांग किसी और से उषा की रश्मियाँ,
आज अपने आप में खुद प्रकाश कर।
जो हो ना सका उसके लिए मत निराश हो,
जो हो सकेगा उसके लिए कुछ प्रयास कर।

बीता हुआ कल तो एक सपना था, उसे जाने दे,
आने वाला कल अपना है, उसे तू पहचान दे।
अंधेरों से लड़ने के लिए, दिया खुद ही बन जा,
गिर कर उठना ही तो है, जीवन का फलसफा।।

- सुख मंगल सिंह ' मंगल ' वाराणसी 

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