शिक्षा की दशा और दिशा
शिक्षा हुई पराई, ज्ञान का भंडार खोया,
जीवन का उद्देश्य, समझने में हम चूके।
अर्थ की खोज में, हमने आत्मा को खो दिया,
शिक्षा हुई पराई, ज्ञान का भंडार खोया।
पुस्तकों के पन्नों में, ज्ञान का सागर छुपा है,
पर हमने तो बस, शब्दों को ही पढ़ा है।
अर्थ का अनर्थ, हमने समझा नहीं,
शिक्षा हुई पराई, ज्ञान का भंडार खोया।
जीवन के अनुभव, हमें सिखाते हैं बहुत कुछ,
पर हमने तो बस, पुस्तकों को ही पढ़ा है।
शिक्षा हुई पराई, ज्ञान का भंडार खोया,
जीवन का उद्देश्य, समझने में हम चूके।
अब भी समय है, समझने का,
शिक्षा का अर्थ, और जीवन का मर्म।
पुस्तकों के पन्नों से, बाहर निकलो,
शिक्षा हुई पराई, ज्ञान का भंडार खोया।
शिक्षा है जीवन, जीवन है शिक्षा,
बस समझने की जरूरत है।
अर्थ को समझो, जीवन को समझो,
शिक्षा हुई पराई, ज्ञान का भंडार खोया ।
- सुखमंगल सिंह
Sukhmangal Singh
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