Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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मैं धरा हूँ

 
मैं धरा हूँ

मैं धरा हूँ
स्वरा हूँ
अन्न जल से भरा हूँ
श्रद्धा- शीतलता लिए
पवन - गगन संग खड़ा हूँ!

भीषण तूफानों के वेग में भी
बड़े चट्टानों सा पड़ा हूँ
सप्तरंगी रंगों में मढ़ा हूँ
शोभा - सादगी से जड़ा हूँ।

अ ज्ञानियों के सर चढ़ा हूँ
ज्ञानियों में ज्ञान से भरा हूँ
मैं धरा हूँ।

रचनाकार - सुख मंगल सिंह

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