जैसी करनी वैसी भरनी
एक छोटे से गाँव में एक आदमी रहता था, जिसका नाम रामू था। वह बहुत ही दयालु और सहायक था। वह हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहता था।
एक दिन, रामू के पड़ोसी का बेटा बीमार हो गया। पड़ोसी बहुत गरीब था और उसके पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे। रामू ने उसकी मदद करने का फैसला किया और उसके बेटे का इलाज करवाया।
कुछ समय बाद, रामू के साथ एक दुर्घटना हो गई। वह एक दुर्घटना में घायल हो गया और उसके पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे। पड़ोसी ने उसकी मदद करने का फैसला किया और उसका इलाज करवाया।
रामू ने पड़ोसी से कहा, "आपने मेरी इतनी मदद की, मैं आपका कर्ज कभी नहीं चुका पाऊंगा।" पड़ोसी ने कहा, "रामू, मैंने तुम्हारी मदद नहीं की, बल्कि तुमने मेरी मदद की थी जब मेरे बेटे को इलाज की जरूरत थी। यह तो बस तुम्हारी करनी का फल है।"
रामू ने समझा कि जैसा उसने किया था, वैसा ही उसके साथ हुआ था। उसने सीखा कि अच्छे कर्म करने से अच्छा फल मिलता है और बुरे कर्म करने से बुरा फल मिलता है।
इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि हमारे कर्मों का फल हमें जरूर मिलता है। अगर हम अच्छे कर्म करेंगे, तो हमें अच्छा फल मिलेगा और अगर हम बुरे कर्म करेंगे, तो हमें बुरा फल मिलेगा। इसलिए, हमें हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए और दूसरों की मदद करनी चाहिए।
- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
वाराणसी वासी
अवध निवासी, अंबेडकर नगर उत्तर प्रदेश
Sukhmangal Singh
Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY