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एक राजा- एक तालाब की कहानी

 

Sukhmangal Singh 


Thu, May 8, 5:28 AM (1 day ago)




एक समय की बात है, एक प्राचीन राजा था जो अपने दिन की शुरुआत एक कुएं में स्नान करके करता था। कुआं राजा की स्नान स्थली होने के कारण बहुत गर्व महसूस करता था। वह सोचता था कि वह सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण है, क्योंकि राजा उसके पानी में स्नान करता है।

एक दिन, राजा ने कुएं की बजाय एक बड़े तालाब में स्नान करना शुरू कर दिया। तालाब को यह बात बहुत पसंद आई और वह गर्व से भर गया। वह सोचने लगा कि अब वह सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि राजा उसके पानी में स्नान करता है।

तालाब ने कुएं को नीचा दिखाना शुरू कर दिया और कहा, "तुम तो छोटे और गहरे हो, राजा अब मेरी पवित्रता में स्नान करते हैं।"

लेकिन राजा की यात्राएं यहीं नहीं रुकीं। वह जल्द ही हिंद महासागर और प्रशांत महासागर की यात्रा करने लगा और वहां स्नान करने लगा। जब राजा ने इन विशाल महासागरों में स्नान करना शुरू किया, तो तालाब को पता चला कि राजा की उपस्थिति वास्तव में कहीं भी हो सकती है, और यह उसकी अपनी महत्वाकांक्षा नहीं थी।

एक दिन, जब राजा फिर से तालाब के पास आया, तो तालाब ने राजा से कहा, "हे राजा, मैं आपको अपने पानी में स्नान करने के लिए आमंत्रित करता हूं।"

राजा ने मुस्कराते हुए कहा, "तालाब, तुम्हारी पवित्रता और महत्व मेरे स्नान से नहीं बढ़ता है, बल्कि तुम्हारी अपनी विशेषता और उपयोगिता से बढ़ता है। मैं जहां भी स्नान करता हूं, वहां की पवित्रता और महत्व बढ़ जाता है, लेकिन यह मेरी उपस्थिति के कारण नहीं, बल्कि वहां के जल की अपनी विशेषता के कारण होता है।"

तालाब को यह बात समझ में आई और उसने अपने गर्व को छोड़ दिया। वह समझ गया कि राजा की स्नान स्थली होने से अधिक महत्वपूर्ण उसकी अपनी उपयोगिता और विशेषता है।

इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि सच्ची महानता और महत्व हमारे अपने गुणों और विशेषताओं से आती है, न कि दूसरों की उपस्थिति या अनुमोदन से।।

- सुख मंगल सिंह 
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक 
वाराणसी वासी ,अवध निवासी 
Sukhmangal Singh

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