Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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"एक मित्र ऐसा भी"

 

"एक मित्र ऐसा भी"

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संसार नहीं, उसे सिर्फ समर्पण चाहिए,  
ना कोई जिद, ना कोई तमन्ना चाहिए।  
बस एक सच्ची सी हंसी चाहिए,  
जिसमें ना कोई स्वार्थ की उम्मीद हो, ना कोई फरियाद हो।

इनकार नहीं, इकरार में मिली हिम्मत रहे,  
कि हाँ, है कोई जो बिना कहे सह ले।  
बस एक एहसास ही सच्ची दोस्ती है,  
जो वक्त आने पर साथ निभा जाए।

इत्र की खुशबू सी महकती है यारी,  
बिन बोले भी सब बात समझ जाती है।  
तू है तो भी, और नहीं भी है,  
फिर भी तेरी आवाज़ रोज़ एहसास दे जाती है।

जो एक सरसराहट, हवा का झोंका बनकर छू जाती है,  
सच्ची यारी हर गुजरे *साथ* लम्हों की याद दिलाती है।  
जीवन में समेटे हुए जैसे *हर पल* चल रही है,  
और वक्त आए तो कृष्ण-सुदामा सा इतिहास लिख जाती है।

राजेश्वरी बाजपेई  
जबलपुर { म. प्र.}

मित्रता दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं 
संकलन करता:- डॉ. सुखमंगल सिंह/वाराणसी 




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