देश-प्रदेश के हित में हुंकार
बिना क्रमांक राष्ट्र सर्वोपरि बोले योगी, ये भारत माँ का मंत्र है,
सीमा का जवान और खेत का किसान, दोनों ही इसके पात्र हैं।
आतंकवाद और भ्रष्टाचार की जड़ें उखाड़ फेंकेंगे हम,
"सबका साथ सबका विकास" से गढ़ेंगे नया संगम। एक सौ चालीस करोड़ दिल एक धड़कन से धड़केंगे,
विकसित भारत का संकल्प लेकर तूफानों से भिड़ेंगे।
उत्तर प्रदेश भारत का हृदय, यहाँ राम-कृष्ण का वास है,
यहाँ बुद्ध की करुणा, यहाँ माँ भारती की साँस है। गुंडाराज मिटा, कानून का राज स्थापित कर दिखाया,
"एक जनपद एक उत्पाद" से गाँव-गाँव को स्वावलंबी बनाया।
एक्सप्रेस-वे की धारा बही, मेडिकल कॉलेजों के दीप जले,
एयरपोर्ट से उड़ान भरी, जवानों के सपने पले। बेटी सुरक्षित, किसान समृद्ध, व्यापारी निडर हो जाए,
नया उत्तर प्रदेश बने, दुनिया सिर झुकाए।
प्रारब्ध के भरोसे नहीं, पुरुषार्थ से लकीर खींचने,,
हर नागरिक सिपाही बनकर देश-प्रदेश को ऊँचा खींचेंगे! जय हिंद, जय भारत! - सुखमंगल सिंह ,वरिष्ठ साहित्यकार ,वाराणसी
बिना क्रमांक राष्ट्र सर्वोपरि बोले योगी, ये भारत माँ का मंत्र है,
सीमा का जवान और खेत का किसान, दोनों ही इसके पात्र हैं।
आतंकवाद और भ्रष्टाचार की जड़ें उखाड़ फेंकेंगे हम,
"सबका साथ सबका विकास" से गढ़ेंगे नया संगम। एक सौ चालीस करोड़ दिल एक धड़कन से धड़केंगे,
विकसित भारत का संकल्प लेकर तूफानों से भिड़ेंगे।
उत्तर प्रदेश भारत का हृदय, यहाँ राम-कृष्ण का वास है,
यहाँ बुद्ध की करुणा, यहाँ माँ भारती की साँस है। गुंडाराज मिटा, कानून का राज स्थापित कर दिखाया,
"एक जनपद एक उत्पाद" से गाँव-गाँव को स्वावलंबी बनाया।
एक्सप्रेस-वे की धारा बही, मेडिकल कॉलेजों के दीप जले,
एयरपोर्ट से उड़ान भरी, जवानों के सपने पले। बेटी सुरक्षित, किसान समृद्ध, व्यापारी निडर हो जाए,
नया उत्तर प्रदेश बने, दुनिया सिर झुकाए।
प्रारब्ध के भरोसे नहीं, पुरुषार्थ से लकीर खींचने,,
हर नागरिक सिपाही बनकर देश-प्रदेश को ऊँचा खींचेंगे! जय हिंद, जय भारत! - सुखमंगल सिंह ,वरिष्ठ साहित्यकार ,वाराणसी
Sukhmangal Singh
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