Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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दहेज

 

*कहानी*


एक छोटे से गाँव में एक गरीब परिवार रहता था। उस परिवार में एक बेटी थी जिसका नाम सोनी था। सोनी के पिता ने अपनी बेटी को पढ़ाया-लिखाया और उसे एक अच्छा इंसान बनाया। जब सोनी की शादी हुई, तो उसके ससुराल वाले दहेज की मांग करने लगे।

सोनी के पिता ने अपनी हैसियत के अनुसार दहेज दिया, लेकिन ससुराल वाले फिर भी और दहेज की मांग करने लगे। उन्होंने कहा कि अगर दहेज नहीं दिया गया, तो वे सोनी को अपने घर में नहीं रखेंगे।

सोनी के पिता ने अपनी बेटी को खुश रखने के लिए अपनी जमीन बेचने का फैसला किया। उन्होंने अपनी जमीन बेचकर दहेज का पैसा दिया, लेकिन ससुराल वालों का मन फिर भी नहीं भरा।

सोनी को यह बात बहुत दुखी कर गई कि उसके ससुराल वाले उसकी खुशी की परवाह नहीं करते हैं। उसने अपने पिता से कहा कि वह उनके बिना नहीं रह सकती है और वह उनके साथ ही रहना चाहती है।

सोनी के पिता ने अपनी बेटी को समझाया कि वह अपने ससुराल में ही रहे और अपने पति के साथ खुश रहे। सोनी ने अपने पिता की बात मानी और अपने ससुराल में रहने लगी।

लेकिन सोनी ने अपने ससुराल वालों को यह समझाने की कोशिश की कि दहेज एक सामाजिक बुराई है और इससे समाज को मुक्ति मिलनी चाहिए। धीरे-धीरे, सोनी के ससुराल वाले भी समझ गए और उन्होंने दहेज की मांग करना बंद कर दिया।

*कविता*

बाप की बेटी की साड़ी तेरे जमी बेंच देता,
फिर भी दहेजी दानव का मन नहीं भरता।

बेटी के लिए पिता का प्यार अपार है,
लेकिन दहेज की मांग में नहीं है प्यार।

ससुराल वाले कहते हैं कि दहेज नहीं तो नहीं,
बेटी को रखने के लिए नहीं है कोई प्यार।

लेकिन बेटी ने समझाया कि दहेज नहीं चाहिए,
प्यार और सम्मान ही चाहिए।

दहेज की बुराई को हमें समझना होगा,
समाज से इसे मिटाना होगा।

बेटी के लिए पिता का प्यार सच्चा है,
दहेज की मांग में नहीं है कोई सच्चाई।

बाप ने जमीन बेच दी,
बेटी के लिए दहेज दिया।
लेकिन लड़के के मां-बाप का पेट नहीं भरा,
दहेज की मांग में नहीं है कोई प्यार।

बेटी के लिए पिता का प्यार अपार है,
लेकिन दहेज की मांग में नहीं है कोई सार।
बाप ने अपनी जमीन बेच दी,
बेटी की खुशी के लिए दहेज दिया।

लेकिन लड़के के मां-बाप का मन नहीं भरा,
दहेज की मांग में नहीं है कोई प्यार।
बेटी को चाहिए प्यार और सम्मान,
दहेज नहीं, यही है सच्चा दान।

बाप की बेटी की खुशी के लिए,
दहेज नहीं, प्यार ही चाहिए।
लड़के के मां-बाप को समझना होगा,
दहेज की बुराई को मिटाना होगा।

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एक बूंद पानी,
एक फूल खिलता है।
एक विचार से,
एक नई शुरुआत होती है।

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- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक 
 वाराणसी वासी,अवध निवासी 


Sukhmangal Singh

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