Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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*स्वागत गीत – रूस के राष्ट्रपति के आगमन पर*

 

*स्वागत गीत – रूस के राष्ट्रपति के आगमन पर*

भारत की धरती पर, गूँजे शहनाई,
सूरज की किरणों में बुनते हैं भाई‑भाई।
रूस के महामहिम, आपका स्वागत है,
दो दिलों की धड़कन, एक ही रीत है।

_कोर —_
स्वागत है, स्वागत है, आपसे रोशन हर बाग,
हिंदुस्तान की शान में, आपका आगमन है त्याग।

गंगा‑यमुना के संग, वोल्गा की लहरें गाएँ,
सांझा इतिहास की कहानी, फिर से लिखें हम आज़ाए।
हाथ मिलाएँ, दिल मिलाएँ, कदम ताल में धड़कें,
भारत‑रूस की दोस्ती में, नई उम्मीदें फड़कें।

_कोर —
स्वागत है, स्वागत है, आपसे रोशन हर बाग,
हिंदुस्तान की शान में, आपका आगमन है त्याग।

दिल्ली की गलियों में, मॉस्को की हवाएँ,
संगीत में बंधी, दो संस्कृति की सवाएँ
दोस्त भारत!” गूँजे,
साथ मिलकर गाएँ, शांति‑सुरक्षा का गीत हम।

_कोर —
स्वागत है, स्वागत है, आपसे रोशन हर बाग,
हिंदुस्तान की शान में, आपका आगमन है त्याग।

आपका कदम जहाँ, वहीँ खिले फूल,
भारत‑रूस का बंधन, बने अनंत मूल।
इन्हीं शुभकामनाओं के साथ, आपका स्वागत है,
दो देशों की मित्रता में, नई सुबह का सूर्य उगे।
- सुख मंगल सिंह
Sukhmangal Singh

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