Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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वृंदावन का इतिहास (रचना में)

 
वृन्दावन की धरा पावन है,
द्वापर युग की कहानी सुनाने को तैयार हूँ।
गुणगान करने जा रहा हूँ, प्रेम की कहानी का,
जहाँ प्रेम का सागर, कृष्ण के रूप में आया है।

वृन्दावन की गलियों में, कृष्ण के कदम पड़े,
गोपियों के साथ, रास लीला रची।
यमुना के किनारे, कृष्ण के बांसुरी की धुन,
गोपियों को बुलाती, प्रेम की कहानी सुनाने को।

द्वापर युग में, कृष्ण का जन्म हुआ,
वृन्दावन की धरा पर, प्रेम का सागर आया।
कृष्ण के बचपन की, कहानियाँ सुनाने को,
वृन्दावन की धरा पावन है, प्रेम की कहानी सुनाने को।

गुलमहार की डालियों पर, कृष्ण के कदम पड़े,
फूलों की सुगंध, प्रेम की कहानी सुनाने को।
वृन्दावन की धरा पावन है, प्रेम की कहानी सुनाने को,
द्वापर युग का गुणगान करने जा रहा हूँ।।

वृंदावन जमुना के किनारे बसा हुआ है,
तुलसी (बृंदा) के गाने बन से सजा था।
कृष्ण के बचपन की, कहानियाँ सुनाने को,
वृंदावन की धरा पावन है, प्रेम की कहानी सुनाने को।

जमुना की लावों में, कृष्ण के कदम पड़े,
गोपियों के साथ, रास लीला रची।
तुलसी की सुगंध, प्रेम की कहानी सुनाने को,
वृंदावन की धरा पावन है, प्रेम की कहानी सुनाने को।

वृंदावन के बन में, कृष्ण के बांसुरी की धुन,
गोपियों को बुलाती, प्रेम की कहानी सुनाने को।
तुलसी के फूलों से, वृंदावन सजा है,
कृष्ण के प्रेम की, कहानी सुनाने को।

वृंदावन की धरा पावन है, प्रेम की कहानी सुनाने को,
जमुना के किनारे, कृष्ण के कदम पड़े।
तुलसी के गाने बन से, वृंदावन सजा है,
कृष्ण के प्रेम की, कहानी सुनाने को।।

चैतन्य महाप्रभु ने 16वीं सदी में,
शिष्यों के साथ इस खोजा, वृंदावन को पाया।
मंदिरों और भक्ति स्थलों को सजाया,
भक्ति का केंद्र बन गया, वृंदावन आया।

चैतन्य महाप्रभु के चरण पड़े, वृंदावन में,
भक्ति की लावों में, प्रेम की कहानी सुनाने को।
शिष्यों के साथ मिलकर, मंदिरों को सजाया,
वृंदावन को बनाया, भक्ति का केंद्र बनाया।

रूपी गोस्वामी, सनातन गोस्वामी, जीव गोस्वामी,
चैतन्य महाप्रभु के शिष्य, वृंदावन को सजाने को।
भक्ति की कहानी, वृंदावन में सुनाई,
चैतन्य महाप्रभु के चरणों में, वृंदावन आया।

वृंदावन की धरा पावन है, भक्ति की कहानी सुनाने को,
चैतन्य महाप्रभु के चरण पड़े, वृंदावन में।
मंदिरों और भक्ति स्थलों से, वृंदावन सजा है,
भक्ति का केंद्र बन गया, वृंदावन आया।।

कृष्ण के प्रिय प्रपौत्र व्रजनाथ ने,
श्री कृष्ण के विग्रह की खोज की, स्थापना किया।
गोविंद देव जी की भी स्थापना की गई,
वृंदावन की धरा पावन है, भक्ति की कहानी सुनाने को।

व्रजनाथ के चरण पड़े, वृंदावन में,
श्री कृष्ण के विग्रह की खोज की, स्थापना किया।
गोविंद देव जी की भी स्थापना की गई,
भक्ति की लावों में, प्रेम की कहानी सुनाने को।

गोविंद देव जी का मंदिर, वृंदावन में है,
कृष्ण के प्रेम की, कहानी सुनाने को।
व्रजनाथ के चरण पड़े, वृंदावन में,
भक्ति का केंद्र बन गया, वृंदावन आया।

वृंदावन की धरा पावन है, भक्ति की कहानी सुनाने को,
कृष्ण के प्रिय प्रपौत्र व्रजनाथ ने, श्री कृष्ण के विग्रह की खोज की।
गोविंद देव जी की भी स्थापना की गई,
वृंदावन की धरा पावन है, भक्ति की कहानी सुनाने को।।

वृंदावन की धरा पावन है, भक्ति की कहानी सुनाने को,
कृष्ण के प्रिय प्रपौत्र व्रजनाथ ने, श्री कृष्ण के विग्रह की खोज की।
गोविंद देव जी की भी स्थापना की गई,
वृंदावन की धरा पावन है, भक्ति की कहानी सुनाने को।

वृंदावन के मंदिरों में, कृष्ण के प्रेम की कहानी सुनाई,
गोविंद देव जी का मंदिर, वृंदावन में है।
व्रजनाथ के चरण पड़े, वृंदावन में,
भक्ति का केंद्र बन गया, वृंदावन आया।

वृंदावन की गलियों में, कृष्ण के कदम पड़े,
गोपियों के साथ, रास लीला रची।
वृंदावन की धरा पावन है, भक्ति की कहानी सुनाने को,
कृष्ण के प्रेम की, कहानी सुनाने को।

और भी बहुत कुछ है, वृंदावन में,
कृष्ण के प्रेम की, कहानी सुनाने को।
वृंदावन की धरा पावन है, भक्ति की कहानी सुनाने को,
कृष्ण के प्रेम की, कहानी सुनाने को।।

औरंगजेब के हमले ने, वृंदावन को बदल दिया,
कृष्ण मंदिर सहित, धार्मिक स्थलों का स्वरूप बदल गया।
वृंदा वन का स्वरूप, बदल गया था,
भक्ति की कहानी, दर्द की कहानी बन गई।

औरंगजेब की सेना ने, वृंदावन पर हमला किया,
कृष्ण मंदिर को तोड़ा, धार्मिक स्थलों को नष्ट किया।
वृंदा वन का स्वरूप, बदल गया था,
भक्ति की लावों में, दर्द की कहानी सुनाई।

वृंदावन की धरा, आंसुओं से नहाई,
कृष्ण के प्रेम की, कहानी दर्द की कहानी बन गई।
औरंगजेब के हमले ने, वृंदावन को बदल दिया,
भक्ति की कहानी, दर्द की कहानी बन गई।

लेकिन वृंदावन की धरा, फिर से उठ खड़ी हुई,
कृष्ण के प्रेम की, कहानी फिर से सुनाई।
वृंदावन की धरा, फिर से पावन हुई,
भक्ति की लावों में, प्रेम की कहानी सुनाई।।

वृंदावन की धरा, फिर से उठ खड़ी हुई,
कृष्ण के प्रेम की, कहानी फिर से सुनाई।
वृंदावन की गलियों में, कृष्ण के कदम पड़े,
गोपियों के साथ, रास लीला रची।

वृंदावन के मंदिरों में, कृष्ण के प्रेम की कहानी सुनाई,
गोविंद देव जी का मंदिर, वृंदावन में है।
व्रजनाथ के चरण पड़े, वृंदावन में,
भक्ति का केंद्र बन गया, वृंदावन आया।

वृंदावन की धरा पावन है, भक्ति की कहानी सुनाने को,
कृष्ण के प्रेम की, कहानी सुनाने को।
वृंदावन की गलियों में, कृष्ण के कदम पड़े,
गोपियों के साथ, रास लीला रची।

और भी बहुत कुछ है, वृंदावन में,
कृष्ण के प्रेम की, कहानी सुनाने को।
वृंदावन की धरा पावन है, भक्ति की कहानी सुनाने को,
कृष्ण के प्रेम की, कहानी सुनाने को।।

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार,
वृंदा नाम की एक तपस्विनी थी,
वृंदा के नाम पर वृंदावन की स्थापना की गई,
सनातन धर्म का प्रमुख केंद्र बना।

वृंदा की तपस्या से, वृंदावन पावन हुआ,
कृष्ण के प्रेम की, कहानी सुनाने को।
वृंदा के नाम पर, वृंदावन की स्थापना हुई,
भक्ति का केंद्र बन गया, वृंदावन आया।

वृंदावन की धरा पावन है, भक्ति की कहानी सुनाने को,
कृष्ण के प्रेम की, कहानी सुनाने को।
वृंदा की तपस्या से, वृंदावन पावन हुआ,
सनातन धर्म का प्रमुख केंद्र बना।

वृंदावन की गलियों में, कृष्ण के कदम पड़े,
गोपियों के साथ, रास लीला रची।
वृंदावन की धरा पावन है, भक्ति की कहानी सुनाने को,
कृष्ण के प्रेम की, कहानी सुनाने को।।

- सुख मंगल सिंह, 
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक, 
वाराणसी वासी, 
अवध निवासी 

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