विश्व की शांति का सपना देखता हर दिल,
जब तक ध्वज पर शांति का सूरज नहीं उगता।
कुछ कहते हैं, अमेरिका को शांत करना होगा,
क्योंकि उसकी गूँज हर कोले में गूँजती है।
यदि उसकी बाँहें तलवार की तरह चलें,
तो धरती का हर कोना बिखर जाएगा।
पर शांति का रास्ता बंद नहीं हो सकता,
जब सारे लोग मिलकर एक स्वर में गाएँ।
हाथों में हाथ, दिलों में दिल,
हम बनेंगे वह पुल जो नदियों को जोड़ता।
जब सीमा नहीं, जब रंग नहीं, जब जात नहीं,
तब सच्ची शांति का संगीत बजता।
अमेरिका शांति की राह पर चलें,
या फिर हम सब मिलकर चलें आगे।
एकता की शक्ति से बड़े कोई हथियार नहीं,
न बम, न बंदूक, बस समझदारी की आवाज़।
जब हर बच्चा चैन की नींद सोए,
तो धरती गाए गीत शांति का।
हम नहीं चाहते युद्ध की ध्वनि,
बस चाहते हैं हँसी की गूँज हर गली में।
इसलिए उठो, साथ चलें, बनें हम एक,
शांति का दीप जलाएँ, हर दिल में।
चाहे अमेरिका शांत हो या न हो,
हम सब मिलकर लिखेंगे इतिहास शांति का।।
-सुख मंगल सिंह,
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
वाराणसी वासी,अवध निवासी
Sukhmangal Singh
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