वर्षा और विरह
मास मधुर हर पल, क्षण मंगल सपन सुंदरी का घूंघट है|
रात सुहानी पपीहा कोयल मधुर आगमन की आहट है।।
उलट गया सब दीवा स्वप्न सा रात विकट ,
पक्षी स्वर कर्कश ।
बिरह अग्नि सा है वर्षा जल,
हर ध्वनि खतरे की आहट है I
विरह वेदना बहुत विकट है.
मास मधुर हर पल।।

इंजीनियर विनीत कुमार सिंह {स्वरचित }
संकलन करता: सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक वाराणसी वासी, अवध निवासी, अंबेडकर नगर जनपद, उत्तर प्रदेश, भारत
Sukhmangal Singh
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