Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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"वंदे मातरम"

 

वंदे भारत भारतीय नव वर्ष आयोजन समिति द्वारा दिनांक 24 अक्टूबर 2026 को ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसकी अध्यक्षता डॉक्टर मधु जी ने किया संचालक कवि प्रेम सागर प्रेम आयोजन आदरणीय चंद्रभानु मिश्र जी ने , इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले रचनाकारों में डॉक्टर सुखमंगल सिंह, वाराणसी वासी अद्ध अशोकजी नरेंद्र त्यागी, सहित दर्जनों लोगों ने भाग लिया । जिसमें सुख मंगल सिंह ने अपनी रचना :-

आयोजक महोदय ने कार्यक्रम के पहले सुखमंगल सिंह को फोन किया था इसलिए रचना शुरू करने पर उन्होंने आयोजन के लिए चार लाइन प्रस्तुत किया:-
माटी अपने राष्ट्र की माथे ,लगाएंगे, 
सोने की चिड़िया देश को फिर से बनाएंगे। वंदे मातरम् 
 दुनिया को यह संदेश पढ़कर ,सुनाएंगे,
राष्ट्र हो सभी से ऊंचा ,यही गाने जाएंगे।। वंदे मातरम्!!
और फिर गीत प्रस्तुत किया:

"वंदे मातरम"

मुखड़ा
हम वंदे मातरम गाएंगे, कोई सोई जनता को जगाएंगे।
मातृभूमि रक्षा के खातिर, तिरंगा सदा लहराएंगे।

अंतरा:-1
भारत माता के चरणों में, शीश अपना झुकाएंगे।
देश की मिट्टी है चंदन, माथे तिलक लगाएंगे।
रग-रग में है जोश भरा, दुश्मन को बतलाएंगे।
सीमा पर जो आँख उठी, उसको धूल चटाएंगे।

अंतरा:-2
वीर भगत, आजाद, बोस के, नारे फिर दोहराएंगे।
खून से लिखी कहानी को, गीतों में गुनगुनाएंगे।
जात-पात के बंधन तोड़, एकता गीत गाएंगे।
हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई, सब मिल गले लगाएंगे।

अंतरा:-3
खेतों में हलधर जो बोए, उसका मान बढ़ाएंगे।
मजदूर के पसीने से, भारत नया बनाएंगे।
शिक्षा की अलख जगाकर, अज्ञान मिटा जाएंगे।
युवा शक्ति है देश की, जग में नाम कमाएंगे।

अंतरा:-4
कसम है हमें तिरंगे की, देश न झुकने पाएंगे।
आन-बान और शान की खातिर, प्राण भी दे जाएंगे।
जब तक साँस है तन में, वंदे मातरम गाएंगे।
मातृभूमि रक्षा के खातिर, तिरंगा सदा लहराएंगे।

आयोजन  चंद्रभानु मिश्र जी के स्वागत में सुख मंगल सिंह ने कहा:-
मैं धरा हूँ

मैं धरा हूँ
स्वरा हूँ
अन्न जल से भरा हूँ
श्रद्धा- शीतलता लिए
पवन - गगन संग खड़ा हूँ!

भीषण तूफानों के वेग में भी
बड़े चट्टानों सा पड़ा हूँ
सप्तरंगी रंगों में मढ़ा हूँ
शोभा - सादगी से जड़ा हूँ।

अ ज्ञानियों के सर चढ़ा हूँ
ज्ञानियों में ज्ञान से भरा हूँ
मैं धरा हूँ।



 निम्नलिखित लोग शामिल थे। सर्वश्री
1-मधु चतुर्वेदी गजरौला(अध्यक्षता)

4-नरेन्द्र वर्मा मस्ताना साहरणपुर
5-डॉ वीणा मित्तल गाज़ियाबाद

7-अनुराधा कुमारी मंगलूर
8-अशोक गोयल चक्रवर्ती हापुड़
9-वीना गोयल हापुड़
10-सुनील कुमार बाजपेयी लखनऊ
11--अनिमेष शर्मा गाज़ियाबाद

13--सुखमंगल सिंह
14--सचिन त्यागी गाज़ियाबाद
15--प्रेम सागर प्रेम नोएडा (संचालन)
डॉ सुखमंगल सिंह 
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक वाराणसी वासी, अवध निवासी अंबेडकर नगर जनपद, उत्तर प्रदेश, भारत मोबाइल नंबर 8931 966034 




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