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बैजनाथ धाम झारखंड

 

बैजनाथ धाम झारखंड प्रदेश की आप देखी कथा


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Sukhmangal Singh 


AttachmentsWed, Oct 1, 11:54 AM (18 hours ago)




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बैजनाथ धाम, झारखंड प्रदेश में स्थित है जहां काशी हिंदी विद्यापीठ के कुलाधिपति डॉ सुख मंगल सिंह वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक वाराणसी वासी अवध निवासी और संरक्षक श्री प्रकाश कुमार श्रीवास्तव गणेश जी काशी हिंदी विद्यापीठ वाराणसी दिनांक 1.10.2025 को सुबह 7:30 बजे से रिलैक्स होटल से टैंपो से बैजनाथ धाम मंदिर दोनों व्यक्ति₹50 अधिक कर पहुंचे और वहां गलियों में देखा तो एक अजब नजारा दिखाई दिया सड़कों पर तो लोगों ने पाठा अर्थात खसी काटकर उसका खून चारों तरफ फैलाए हुए थे और जब मंदिर के पास पहुंचा तो मंदिर की गलियों में भी उसी तरह का नजारा दिखाई दिया जो क्लिक करने पर आपको फोटो में दिखाई देगा। 
इसके बाद दोनों लोगों ने फूल माला तथा  गंगा जल ₹100 पर हेड लिया लाइन में लग गए लाइन में जाने के लिए कई जगह वहां पर स्थित पांडवों ने स्वयं दर्शन करने की बात कह हम दोनों को बरगला रहे थे परंतु हम लोग कुछ दूर पैदल चलकर ऊपर से जाने वाली सरकार द्वारा बनाई गई सड़क से 3000 पग चल कर जो छोटे लोगों द्वारा तय किया जा सकता है और बड़े लोग 2000 पग चल कर मंदिर परिसर तक पहुंच सकते हैं ।
इस प्रकार चलकर ढाई घंटे में बाबा बैजनाथ धाम गृह गर्भ गृह में पहुंच गया। गर्भ ग्रह के पहले सी आई एफ और पुलिस लगी  हुई थी जो लोगों को अंदर कर रही थी परंतु अंदर जाने पर गर्भ गिरी के अंदर एक अलग ही नजारा था सबसे पहले तो गेट पर एक पांडा लगा हुआ था जिसके हाथ में लगभग ₹3000 दिखाई दिए जो अंदर जाने वाले लोगों से वसूल था और यह कहकर की यहां दान देकर अंदर जाइए। 
गर्भ गिरी के अंदर लगभग 10 ,12 पंडे मौजूद थे जिनके द्वारा भी लोगों से पैसे वसूले जा रहे थे वह वसूली करने वालों को कुछ देर तो अंदर गए बिजली के गोल राउंड में रुकने के लिए समय देता था बाकी सारे लोगों को धकेल कर बाहर कर देता था। एक पांडा वहां पर हमें और काशी हिंदी विद्यापीठ के संरक्षक श्री प्रकाश कुमार श्रीवास्तव गणेश जी को घर कर दर्शन करने के लिए और जो हाथ में गंगा जल था बैजनाथ धाम के शिवलिंग पर गंगा जल चढ़ावाया परंतु हमने देखा कि वह प्रकाश जी को बैजनाथ जी के शिवलिंग को छूने का मौका मिला परंतु में इतनी भीड़ थी और इतना धक्का मुखी थी लोगों को धकेल धकेल कर बाहर कर रहा है थे सब पांडे इसलिए मैं छू नहीं सका और मेरी कमर में कुछ तकलीफ भी थी क्योंकि स्लिप डिस्क है इसलिए भी मैं झुकना बहुत ज्यादा पसंद नहीं किया और आगे बढ़ गया। श्री प्रकाश जी से उसे पंडित ने जिसे दर्शन कराया और शिवलिंग छूने का मौका दिया वह उनसे कुछ पैसे वसूल कर लिया।
मैं तो बाहर पहले ही आ गया था परंतु प्रकाश जी कुछ देर बाद आए और हम दोनों लोग फिर उसी गली से हो किसी तरह से निकलते हुए उसे बकरे के खून को बचाकर आगे बढ़ा और टेंपो की तलाश में आगे निकल आए। 
फिर टेंपो मिला और टेंपो से₹50 देकर होटल तक आया।
यह रीति है कुरीति इस पर विचार करने की आवश्यकता है। 
इस तरह नवमी के दिन सड़कों पर खून बहना कहीं से भी मैं जायज नहीं समझ सकता। 
बैजनाथ धाम में पूरे देश के लोग आते हैं विदेश से भी लोग आते हैं दर्शन करने के लिए क्योंकि यह एक ऐतिहासिक धाम है जो रावण और शिव से जुड़ा हुआ है इतिहास में इसका विशेष महत्व है ऐसे में यहां सड़कों पर खून की नदियां बहन कहीं से भी जायज नहीं कहा जा सकता इस पर विचार करना होगा हम झारखंड सरकार से अनुरोध करते हैं कि इस तरह की कुरीतियों पर ध्यान दें और आगे आने वाले समय में इस तरह सार्वजनिक रूप से सड़कों को गंदा न करें समाज में गलत तरह का संदेश इससे जा सकता है। 
यदि मेरी बातें कहीं से भी गलत हो तो उसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं जैसा कि हमने अपने जीवन में देखा है समझा है पढ़ा है उसके हिसाब से अपनी मन बुद्धि से इसे लिखने का प्रयास किया हूं। 
- सुख मंगल सिंह
 वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक 
 वाराणसी वासी 
 अवध निवासी 
दिनांक 1.10.2025 दिन बुधवार 

Sukhmangal Singh


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