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अप्रकाशित गीत

 
अप्रकाशित गीत

चकाचौंध वाली दुनियां में, पांव संभल कर रखना होगा
भीड़ बहुत है राहों में, खुद को बचाकर चलना होगा

यहाँ हर चेहरा हँसता है, पर दिल में क्या पता नहीं
मीठी-मीठी बातों का, मतलब समझना होगा

चकाचौंध वाली दुनियां में, पांव संभल कर रखना होगा,
जो दिखता है सोना सा, वो सोना नहीं होता।

रील की इस दुनिया में, सब कुछ फीका लगता है,
असल जिंदगी के सुख को, दिल से परखना होगा।

चकाचौंध वाली दुनियां में, पांव संभल कर रखना होगा,
अपने ही जब गिराते हैं, गैरों से क्या गिला।

मिट्टी से जुड़े रहना, आसमां को छूकर भी,
जड़ों को अपने सींचकर, वटवृक्ष बनना होगा।

चकाचौंध वाली दुनियां में, पांव संभल कर रखना होगा,
पैसा सब कुछ नहीं है, ये भी तो समझना होगा।

ईमान की चादर ओढ़कर, जो चलता है जग में,
उसी का नाम अँधेरे में, दिया बन जलता होगा।।
- डॉ. सुखमंगल सिंह/ वाराणसी



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