Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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तुम वही तो नहीं

 
तुम वही तो नहीं, जो कभी मेरे साथ थे,
तुम वही तो नहीं, जो कभी मेरे दिल में थे।
तुम्हारी आंखों में, अब वो चमक नहीं है,
तुम्हारी बातों में, अब वो मिठास नहीं है।

तुम वही तो नहीं, जो कभी मेरे सपनों में थे,
तुम वही तो नहीं, जो कभी मेरे जीवन में थे।
तुम्हारी यादों में, अब वो खुशबू नहीं है,
तुम्हारी बातों में, अब वो गर्मी नहीं है।

तुम वही तो नहीं, जो कभी मेरे साथ चलते थे,
तुम वही तो नहीं, जो कभी मेरे दिल को छूते थे।
तुम्हारी आंखों में, अब वो प्यार नहीं है,
तुम्हारी बातों में, अब वो अपनापन नहीं है।

तुम वही तो नहीं, जो कभी मेरे जीवन को रोशन करते थे,
तुम वही तो नहीं, जो कभी मेरे दिल को खुश करते थे।
तुम्हारी यादों में, अब वो दर्द है,
तुम्हारी बातों में, अब वो खामोशी है।

तुम वही तो नहीं, जो कभी मेरे साथ थे,
तुम वही तो नहीं, जो कभी मेरे दिल में थे।
अब तुम एक अजनबी हो, मेरे लिए,
एक अनजान चेहरा, मेरे सामने।।

- सुख मंगल सिंह
 वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक 
 वाराणसी 


Sukhmangal Singh

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