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" तेरी खामोशी मुझे जीने नहीं देती है "

 


" तेरी खामोशी मुझे जीने नहीं देती है "

गजल

अंत में नहीं देती है। हर दूसरी लाइन के अंत में।


तेरी यादों में खोया रहता हूँ,

तेरी खामोशी मुझे जीने नहीं देती है।


तेरे बिना यह दिल बेचैन रहता है,

तेरी आवाज़ की गूंज मुझे सोने नहीं देती है।


तेरे प्यार में डूबा रहता हूँ,

तेरी जुदाई मुझे हंसने नहीं देती है।


तेरे सपनों में खोया रहता हूँ,

तेरी यादें मुझे भूलने नहीं देती है।


तेरे बिना यह जीवन सूना लगता है,

तेरी मौजूदगी मुझे तन्हा नहीं देती है।


तेरे प्यार की बारिश में भीगता रहता हूँ,

तेरी जुदाई मुझे सूखने नहीं देती है।


तेरे बिना यह दिल टूट जाता है,

तेरी यादें मुझे संभलने नहीं देती है।


तेरे प्यार में मैं मर जाता हूँ,

तेरी खामोशी मुझे जीने नहीं देती है।।

- सुख मंगल सिंह

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Sukhmangal Singh

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