*सुखमंगल सिंह की यादें*
आज दिनांक 23 अक्टूबर 2025 को बल रामपुर, लखनऊ हॉस्पिटल में सुखमंगल सिंह दिखाकर वापस अपने रूम पर आते समय शाहिद उद्यान के पास पहुंचे तो उन्हें 6 अगस्त 1994 की याद आने लगी। वह सद्भावना यात्रा लेकर इस मार्ग से सीतापुर मार्ग से होते हुए कश्मीर जा रहे थे।
उस समय की यादें अभी भी उनके दिल में ताजा हैं। वह अपने साथियों के साथ यात्रा कर रहे थे, और उनके चेहरे पर खुशी और उत्साह था। वह कश्मीर की सुंदरता और शांति की बातें कर रहे थे, और उनके दिल में एक उम्मीद थी कि वहाँ की जनता के साथ मिलकर शांति और भाईचारे का संदेश देंगे।
लेकिन उस समय की एक घटना ने उनके दिल को झकझोर दिया था। वह शाहिद उद्यान के पास पहुंचे तो उन्होंने देखा कि कुछ लोग वहाँ पर लड़ रहे थे। उन्होंने अपने साथियों को रोक दिया और वहाँ जाकर देखा कि दो समूहों के बीच लड़ाई हो रही थी।
सुखमंगल सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर उन लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। उन्होंने अपने साथियों को कहा कि वे शांति से बात करें और लड़ाई को रोकने की कोशिश करें।
उस समय की यादें अभी भी सुखमंगल सिंह के दिल में ताजा हैं। वह कहते हैं कि उस समय उन्होंने सीखा कि शांति और भाईचारे का संदेश देना कितना महत्वपूर्ण है। वह आज भी अपने मिशन पर हैं और लोगों को शांति और भाईचारे का संदेश देते हैं।
9 अगस्त 1994 की वह ऐतिहासिक तारीख थी जब सद्भावना यात्रा लखनऊ पहुंची थी। उस समय सुखमंगल सिंह और उनके साथी शांति और भाईचारे का संदेश लेकर यात्रा पर निकले थे। लखनऊ में उनका भव्य स्वागत हुआ, और उन्होंने विशिष्ट लोगों से मुलाकात की।
उस समय के जिला अधिकारी खरे साहब ने भी उनकी यात्रा की सफलता की कामना की और सुखमंगल सिंह को एक पत्र दिया जिसमें उनकी शुभकामनाएं थीं। इसके अलावा, जिलाधिकारी के अर्दली रामखेलावन ने भी सुखमंगल सिंह की पंजिका पर शुभकामना दर्ज की और हस्ताक्षर किए।
यह यात्रा रामपुर होते हुए आगे बढ़ी और लोगों को शांति और भाईचारे का संदेश दिया। यह यात्रा न केवल लोगों को एकजुट करने का एक प्रयास था, बल्कि यह भी दिखाने का एक तरीका था कि शांति और भाईचारा कैसे समाज को मजबूत बना सकता है।
15 अगस्त 1994 को सुखमंगल सिंह जी की सद्भावना यात्रा दिल्ली पहुंची थी। उस समय वह अपने साथियों के साथ यात्रा पर निकले थे और शांति और भाईचारे का संदेश दे रहे थे। दिल्ली में उनका भव्य स्वागत हुआ, और उन्होंने विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेई जी से मुलाकात की।
सुखमंगल सिंह जी ने अटल बिहारी वाजपेई जी को एक लोटिया, काशी से गंगाजल और एक रुद्राक्ष की माला भेंट की। इसके बाद वह राष्ट्रपति भवन पहुंचे और वहां पर भी उपरोक्त सामान भेंट किया। उन्होंने अपनी पंजिका पर कार्यरत कर्मचारियों से हस्ताक्षर भी कराया।
यह यात्रा न केवल लोगों को एकजुट करने का एक प्रयास था, बल्कि यह भी दिखाने का एक तरीका था कि शांति और भाईचारा कैसे समाज को मजबूत बना सकता है। सुखमंगल सिंह जी की यह यात्रा बहुत ही सफल रही और लोगों ने उनके संदेश को बहुत ही उत्साह के साथ स्वीकार किया।
इस यात्रा के दौरान सुखमंगल सिंह जी ने कई महत्वपूर्ण लोगों से मुलाकात की और अपने संदेश को फैलाने का काम किया। यह यात्रा न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण घटना थी।
15 अगस्त 1994 को सुखमंगल सिंह जी की सद्भावना यात्रा दिल्ली के रोहिणी सेक्टर बी में पहुंची थी। उस समय वह अपने साथियों के साथ यात्रा पर निकले थे और शांति और भाईचारे का संदेश दे रहे थे।
उस समय भारत के प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव जी थे। सुखमंगल सिंह जी ने रोहिणी सेक्टर बी में जाकर झंडा फहराया और लोगों को इस यात्रा का उद्देश्य बताया, जो आपसी भाईचारा और शांति कायम करने के लिए था।
इस यात्रा के दौरान सुखमंगल सिंह जी और उनके साथियों का भव्य स्वागत हुआ। लोगों ने उनके संदेश को बहुत ही उत्साह के साथ स्वीकार किया और उनके साथ मिलकर शांति और भाईचारे के लिए काम करने का संकल्प लिया।
यह यात्रा न केवल लोगों को एकजुट करने का एक प्रयास था, बल्कि यह भी दिखाने का एक तरीका था कि शांति और भाईचारा कैसे समाज को मजबूत बना सकता है।
इस आलेख से हमें कई महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं:
1. *शांति और भाईचारे का महत्व*: सुखमंगल सिंह जी की सद्भावना यात्रा ने हमें शांति और भाईचारे के महत्व को समझने का मौका दिया। यह यात्रा न केवल लोगों को एकजुट करने का एक प्रयास था, बल्कि यह भी दिखाने का एक तरीका था कि शांति और भाईचारा कैसे समाज को मजबूत बना सकता है।
2. *एकता और सहयोग की आवश्यकता*: इस यात्रा ने हमें यह भी सिखाया कि एकता और सहयोग की आवश्यकता है ताकि हम अपने समाज में शांति और भाईचारा कायम रख सकें।
3. *नेतृत्व और मार्गदर्शन का महत्व*: सुखमंगल सिंह जी की यात्रा ने हमें यह भी सिखाया कि नेतृत्व और मार्गदर्शन का महत्व है। उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर शांति और भाईचारे के लिए काम किया और लोगों को प्रेरित किया।
इस आलेख का संदेश समाज पर यह है:
- *शांति और भाईचारे की आवश्यकता*: समाज को शांति और भाईचारे की आवश्यकता है, और हमें इसके लिए काम करना चाहिए।
- *एकता और सहयोग की आवश्यकता*: समाज को एकता और सहयोग की आवश्यकता है, ताकि हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें।
- *नेतृत्व और मार्गदर्शन का महत्व*: समाज को नेतृत्व और मार्गदर्शन की आवश्यकता है, ताकि हम सही दिशा में आगे बढ़ सकें।
- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
वाराणसी वासी
अवध निवासी
Sukhmangal Singh
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