श्री राम और राजमाता कौशल्या के माता-पुत्र के आदर्शों पर एक कविता:
राजमाता कौशल्या की गोद में,
श्री राम ने जन्म लिया।
माता की ममता की छांव में,
उन्होंने बचपन बिताया।
कौशल्या की आंखों का तारा,
श्री राम थे उनके प्राण।
उनकी ममता की गहराई में,
श्री राम ने पाया सम्मान।
श्री राम की मर्यादा,
कौशल्या की शिक्षा का परिणाम।
उनकी माता की सीख,
उन्होंने जीवन में उतारा।
राजमाता कौशल्या की,
ममता की कोई सीमा नहीं।
श्री राम के लिए,
उन्होंने अपना सब कुछ दिया।
श्री राम की वीरता,
कौशल्या की प्रेरणा का परिणाम।
उनकी माता की आशीर्वाद,
उन्होंने जीवन में पाया।
माता-पुत्र के आदर्शों की,
यह एक अनोखी कहानी।
श्री राम और कौशल्या की,
ममता की यह एक अनमोल निशानी।
उनकी ममता की गहराई में,
श्री राम ने पाया जीवन का अर्थ।
उनकी माता की सीख,
उन्होंने जीवन में उतारा।
श्री राम और कौशल्या की,
ममता की यह एक अनमोल कहानी।
माता-पुत्र के आदर्शों की,
यह एक अनोखी निशानी।।
- सुख मंगल सिंह
वाराणसी
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