"श्रीकृष्ण जन्मोत्सव गीत "
बजी बधाई गोकुल में, नंद घर आनंद भयो,
कंक्रीट के जंगल में भी, कान्हा का जन्म भयो।
मथुरा कारागार खुला, जमुना जल ठहरा है,
मोर मुकुट पीताम्बर धारी, जग को रूप लुभा है।
हाथ में मुरली, मुख पर मुस्कान, नयनन में प्रेम भरा,
झूला झूले आँगन में, हर मन कान्हा ने हरा।
राधा ने गाया सोहर, यशोदा ने लोरी गाई,
गंगा यमुना संगम जैसे, प्रेम की धारा आई।
मंगल कहे हे कान्हा, आओ फिर से इस ठेला में,
धर्म की फिर स्थापना करो, इस जीवन के मेला में।
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