शिव तो है आशुतोष
शिव तो है आशुतोष, भोले हैं महादेव
हर लेता है सदा, भक्तों के सब भय को
नीलकंठ है शंकर, शरणागत को दयाल
देता है सदा, सुख को भर के हाथों में ।
शिव तो है आशुतोष, त्रिलोकी के हैं राज
भस्म लिपटे हैं अंग, नागों का है ताज
तीन नेत्र हैं जिनके, तीसरा है अग्नि समान
देता है सदा, ज्ञान का है दीपक ज्ञान ।
शिव तो है आशुतोष, कल्याण का है रूप
भक्तों के लिए है, सदा रहता है भूप
शिवलिंग में है, शक्ति का है संचार
देता है सदा, मुक्ति का है द्वार हँस ।
शिव तो है आशुतोष, आनंद का है रूप
भक्तों के लिए है, सदा रहता है भूप
शिवलिंग में है, शक्ति का है संचार
देता है सदा, मुक्ति का है द्वार हँस।
शिव तो है आशुतोष, भोले हैं महादेव
हर लेता है सदा, भक्तों के सब भय को
नीलकंठ है शंकर, शरणागत को दयाल
देता है सदा, सुख को भर के हाथों में ।
शिव तो है आशुतोष, त्रिलोकी के हैं राज
भस्म लिपटे हैं अंग, नागों का है ताज
तीन नेत्र हैं जिनके, तीसरा है अग्नि समान
देता है सदा, ज्ञान का है दीपक ज्ञान ।
शिव तो है आशुतोष, कल्याण का है रूप
भक्तों के लिए है, सदा रहता है भूप
शिवलिंग में है, शक्ति का है संचार
देता है सदा, मुक्ति का है द्वार हँस ।।
- सुखमंगल सिंह
वाराणसी वासी, अवध निवासी को अवध निवासी अंबेडकर नगर उत्तर प्रदेश
Sukhmangal Singh
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