संकष्टी चतुर्थी पर एक विस्तृत गीत प्रस्तुत है:
*जय गणेश जय गणेश देवा*
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा
*अंतरा 1*
शिव के गणों को गौरा माँ ने
द्वार-दरबार बिठाया
खिला-पिला सब गणों को
फिर स्नान को माता धाया
*अंतरा 2*
ब्रह्मा-विष्णु भी आए समझाने
पर बालक न माने बात
अंत में शंकर क्रोध में आए
त्रिशूल चला तत्काल
*अंतरा 3*
गिर पड़ा ललना धरती पर
"माँ" कह पुकार लगाई
सुनकर पुकार पार्वती
विनाश रूप धर आई
*अंतरा 4*
शिव ने देखा ये हाल
तो बोले हे पार्वती
मेरी शक्ति है तुम
तुम्हीं हो जगदम्बा
*अंतरा 5*
गणेश को उठाकर बोले
हे पुत्र तुम मेरे
तुम्हारी माँ ने तुम्हें
पुत्र रूप में पाया है
*अंतरा 6*
तुम्हारी पूजा होगी
सबसे पहले तुम्हारी
तुम्हारी जय-जयकार होगी
सब जगह तुम्हारी ।
संकष्टी चतुर्थी एक हिंदू त्योहार है जो भगवान गणेश की पूजा के लिए मनाया जाता है। यह त्योहार हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है।
*संकष्टी चतुर्थी का महत्व*
संकष्टी चतुर्थी का महत्व भगवान गणेश की पूजा और उनकी कृपा प्राप्त करने में है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि वे सभी विघ्नों और बाधाओं को दूर करने वाले हैं।
*संकष्टी चतुर्थी की कथा*
संकष्टी चतुर्थी की कथा के अनुसार, भगवान गणेश ने अपने पिता शिव के कहने पर चंद्रमा को दर्शन दिए थे। चंद्रमा ने भगवान गणेश की पूजा की और उनकी कृपा प्राप्त की।
*संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि*
संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि निम्नलिखित है:
1. सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें।
2. भगवान गणेश की मूर्ति को स्नान कराएं और उन्हें नए कपड़े पहनाएं।
3. भगवान गणेश को फूल, फल, और मोदक अर्पित करें।
4. भगवान गणेश की पूजा करें और उनकी कृपा की प्रार्थना करें।
5. संकष्टी चतुर्थी की कथा पढ़ें और भगवान गणेश की जय-जयकार करें।
*संकष्टी चतुर्थी के लाभ*
संकष्टी चतुर्थी के लाभ निम्नलिखित हैं:
1. भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है।
2. सभी विघ्न और बाधाएं दूर होती हैं।
3. धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
4. पुत्र और परिवार की सुख-समृद्धि होती है।
संकष्टी चतुर्थी के और नाम गुण गौरव निम्नलिखित हैं:
*संकष्टी चतुर्थी के अन्य नाम*
1. संकष्टी
2. संकष्टी चतुर्थी
3. गणेश चतुर्थी
4. विघ्नेश्वर चतुर्थी
5. वक्रतुंड चतुर्थी
6. एकदंत चतुर्थी
7. गजानन चतुर्थी
*संकष्टी चतुर्थी के गुण*
1. भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है।
2. सभी विघ्न और बाधाएं दूर होती हैं।
3. धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
4. पुत्र और परिवार की सुख-समृद्धि होती है।
5. मानसिक शांति और आनंद की प्राप्ति होती है।
6. आत्म-ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार की प्राप्ति होती है।
*संकष्टी चतुर्थी का गौरव*
1. भगवान गणेश का जन्मदिन है।
2. भगवान गणेश की पूजा और उपासना का विशेष दिन है।
3. सभी हिंदू समुदायों में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है।
4. भगवान गणेश की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का एक अवसर है।
5. आत्म-शुद्धि और आत्म-विकास का एक अवसर है।।
- सुख मंगल सिंह,
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक,
वाराणसी वासी,
अवध निवासी
Sukhmangal Singh

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