आगे पीछे दरख्तों की हरियाली रखो,
सनातन संस्कृति की खुशहाली देखो।
हर घर में ज्ञान का दीप जलाओ,
शिक्षा और जागरण का मार्ग दिखाओ।
आंदोलन का बिगुल बजाओ, परिवर्तन लाओ,
अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाओ।
सामाजिक बुराइयों को दूर भगाओ,
नए युग की शुरुआत करो, आगे बढ़ो।
शिक्षा और जागरण का महत्व समझो,
अपने बच्चों को शिक्षित बनाओ।
सनातन संस्कृति की रक्षा करो,
अपने पूर्वजों की विरासत को संभालो।
आगे पीछे दरख्तों की हरियाली रखो,
सनातन संस्कृति की खुशहाली देखो।
हर घर में ज्ञान का दीप जलाओ,
शिक्षा और जागरण का मार्ग दिखाओ।
समय आया है, जागो और आगे बढ़ो,
अपने सपनों को पूरा करो, हिम्मत दिखाओ।
सामाजिक बुराइयों को दूर भगाओ,
नए युग की शुरुआत करो, आगे बढ़ो।
शिक्षा और जागरण का महत्व समझो,
अपने बच्चों को शिक्षित बनाओ।
सनातन संस्कृति की रक्षा करो,
अपने पूर्वजों की विरासत को संभालो।।
आगे पीछे दरख्तों की हरियाली रखो,
सनातन संस्कृति की खुशहाली देखो।
हर घर में ज्ञान का दीप जलाओ,
शिक्षा और जागरण का मार्ग दिखाओ।
आंदोलन का बिगुल बजाओ, परिवर्तन लाओ,
अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाओ।
सामाजिक बुराइयों को दूर भगाओ,
नए युग की शुरुआत करो, आगे बढ़ो।
शिक्षा और जागरण का महत्व समझो,
अपने बच्चों को शिक्षित बनाओ।
सनातन संस्कृति की रक्षा करो,
अपने पूर्वजों की विरासत को संभालो।
आगे पीछे दरख्तों की हरियाली रखो,
सनातन संस्कृति की खुशहाली देखो।
हर घर में ज्ञान का दीप जलाओ,
शिक्षा और जागरण का मार्ग दिखाओ।
समय आया है, जागो और आगे बढ़ो,
अपने सपनों को पूरा करो, हिम्मत दिखाओ।
सामाजिक बुराइयों को दूर भगाओ,
नए युग की शुरुआत करो, आगे बढ़ो।
शिक्षा और जागरण का महत्व समझो,
अपने बच्चों को शिक्षित बनाओ।
सनातन संस्कृति की रक्षा करो,
अपने पूर्वजों की विरासत को संभालो, और आगे बढ़ो।
आंदोलन का बिगुल बजाओ, परिवर्तन लाओ,
अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाओ।
सामाजिक बुराइयों को दूर भगाओ,
नए युग की शुरुआत करो, आगे बढ़ो, और खुशहाली देखो।।
- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
वाराणसी वासी
अवध निवासी
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