"साहित्य की स्वर्ग विभा: डॉ. तारा सिंह — शब्दों के सेतु, सृजन के सारथी"
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आज जब हिंदी साहित्य डिजिटल युग में नए आयाम छू रहा है, तब मुंबई से निकलने वाली ‘स्वर्ग विभा अंतरराष्ट्रीय ई-पत्रिका’ ने विश्व पटल पर अपनी अलग पहचान बनाई है। इस पत्रिका की आत्मा, इसकी सारथी और प्रधान संपादक हैं — *डॉ. तारा सिंह*। जिन्हें हाल ही में उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए ‘डॉ. तारा सिंह इंटरनेशनल अचीवमेंट अवार्ड 2026’ व ‘स्वर्ग विभा अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है।
1. *कौन हैं डॉ. तारा सिंह? एक परिचय*
डॉ. तारा सिंह एक बहुमुखी प्रतिभा संपन्न हिंदी साहित्यकार हैं। उनकी शिक्षा — साहित्य रत्न, राष्ट्रभाषा विद्यालंकार, विद्या वाचस्पति, विद्या वारिधि आदि तक विस्तृत है। वे कविता, कहानी, उपन्यास, ग़ज़ल, फिल्मी गीत और निबंध लेखन में समान रूप से दक्ष हैं।
हमारी जानकारी के अनुसार अब तक उनके *46 ग्रंथ प्रकाशित* हो चुके हैं — 4 उपन्यास, 20 काव्य-संग्रह, 15 कहानी-संग्रह, 7 ग़ज़ल संग्रह। प्रमुख कृतियां: ‘एक बूँद की प्यासी’, ‘सिसक रही दुनिया’, ‘हम पानी में भी खोजते रंग’, ‘एक दीप जला लेना’। उनके गीत हिंदी फिल्म ‘जयहिन्द सिपाई जी’ में भी शामिल हुए।
2. *‘स्वर्गविभा’ — हिंदी का वैश्विक मंच*
डॉ. तारा सिंह ‘स्वर्गविभा ऑनलाइन त्रैमासिक हिंदी पत्रिका’ की प्रधान संपादक हैं। मुझे अक्टूबर से दिसंबर 2025 का एक अंक प्राप्त हुआ है।इसका प्रकाशन नवी मुंबई, सेक्टर-18 प्लॉट नंबर 6, सानपाड़ा से होता है। यह पत्रिका 2021, 2022 और 2025 तक निरंतर प्रकाशित हो रही ।
‘स्वर्गविभा’ सिर्फ पत्रिका नहीं, एक आंदोलन है। इसका उद्देश्य हिंदी को विश्व स्तर पर स्थापित करना और नवोदित रचनाकारों को मंच देना है। हमारे जैसे हजारों लेखकों की 1000 से अधिक रचनाओं को इस पत्रिका ने प्रकाशित कर साहित्यिक इच्छाओं को ऊंचाई दी है। डॉ. तारा सिंह की संपादकीय दृष्टि ने अनगिनत कलमों को पहचान दी। डॉ श्रीमती तारा सिंह द्वारा लिखित एक राष्ट्रगीत प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा हूं:
करो भारत को नमन ,बोलो भारतीय हैं हम
भारत की माटी नहीं, चंदन से कम
करो भारत को नमन बोलो भारतीय हैं हम
हम कहीं भी जीयें, हम कहीं भी रहें
न उतरे कभी, भारतीयता का रंग
करो भारत को नमन, बोलो भारतीय हैं हम ---
*सम्मान और उपलब्धियां: 255 से अधिक अलंकरण*
डॉ. तारा सिंह के उत्कृष्ट कार्यों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। उन्हें अब तक *255 से अधिक पुरस्कार/सम्मान* मिल चुके हैं। प्रमुख सम्मान:
- ‘विद्या वारिधि (डी. लिट्.)’ — भारतीय साहित्यकार संसद, समस्तीपुर f8dd
- ‘महादेवी वर्मा सम्मान’, अखिल भारतीय साहित्यकार समिति, मथुरा f8dd
- ‘हिन्दी रत्न’, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान अकादमी, कुशीनगर
- ‘Rising Personalities of India Award’ & Gold Medal — International Penguin Publishing House f8dd
- ‘श्रेष्ठ साधना सम्मान’, भोपाल
साथ ही ‘डॉ. तारा सिंह विशिष्ट राष्ट्रीय सम्मान 2025’ उनके नाम पर दिया जाता है, जिससे इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक, कवि सुख मंगल सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक वाराणसी जैसे साहित्यकार सम्मानित हुए हैं।
4. *लेखन की विशेषता: जीवन-दर्शन की कविता*
डॉ. तारा सिंह के लेखन में सामाजिक-पारिवारिक संबंधों की वास्तविकता, प्रेम-विरह, जीवन-दर्शन, जन्म-मृत्यु चक्र जैसे गंभीर विषय मिलते हैं। उनकी रचनाएं गंभीर चिंतन, विषयों की गति और जीवन-दर्शन से भरपूर हैं।
डॉक्टर तारा सिंह जी की
60 कृतियां स्वर्गीय पुस्तकों के रूप में:
23 काव्य संग्रह: एक बूंद की प्यासी, सिसक रही दुनिया,
एक पालकी चार कहार, एक दीप जला लेना, हम पानी में भी खोजने रंग, सांझ भी हुई तो कितनी धुंधली, स्वर्ग सेतु है नारी, अब तो ठंडी हो चली जीवन की राख आदि।
12 उपन्यास जिसमें: दूसरी औरत, जिंदगी, बेवफा मैं नहीं, बेपनाह मोहब्बत, बासी फूल, नींद हमारी ख्वाब तुम्हारे सहित 12 उपन्यास की रचना किया है।
आपके आलेख संग्रह में: निबंध सरिता और ज्योत्सना सहित तीन आलेख जो मेरी जानकारी के अनुसार।
कहानी संग्रह में रसवंती, तृषा, समीरा ,दीपशिखा, क्षितिज के पार आदि कहानी प्रमुख है।
डॉक्टर तारा सिंह जी की नो गजले प्रमुख रूप से समाज के समक्ष अपना स्थान गौरव प्राप्त किया है जिसमें- अपनी तलाश में , गुलिस्तान - ए - हयात, सैर - ए - गुलिस्तां आदि प्रमुख है।
*विश्वव्यापी पहचान*
उनकी पुस्तकें Google Books, Amazon, Flipkart, http://Pothi.com, Kobo, केंद्रीय-राज्य पुस्तकालयों और 30 से अधिक वेबसाइटों पर उपलब्ध हैं। उनकी जीवनी “TARA SINGH AUTHOR” अमेरिका से प्रकाशित हुई है और Who’s Who में 9 बार शामिल हो चुकी हैं।
*निष्कर्ष: सृजन की देवी*
डॉ. तारा सिंह सिर्फ संपादक नहीं, वे साहित्य की ‘स्वर्गविभा’ हैं। उन्होंने अपनी कलम और पत्रिका के माध्यम से हिंदी को अंतरराष्ट्रीय मंच दिया। 1000 रचनाओं को प्रकाशित कर अनगिनत इच्छाओं को पंख दिए। उनका जीवन संदेश देता है — जब इरादे नेक हों, तो एक महिला अकेले ही साहित्य का सूरज बन सकती है।
आज ‘स्वर्गविभा’ और डॉ. तारा सिंह का नाम हिंदी सेवा का पर्याय बन चुका है। वे सचमुच ‘माइल स्टोन’ हैं — जिन्होंने शब्दों से विश्व पटल पर हिंदी की ऊंचाई लिखी है। आगे क्रमवार ---
- सुख मंगल सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक, वाराणसी वासी, अवध निवासी, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश, भारत। मोबाइल नंबर 8931966034
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