आज का दिन है खास, राष्ट्रीय प्रेस दिवस,
कलम की गूँज से जगमगाए हर आवाज़,
चौथे स्तम्भ की महिमा, लोकतंत्र की शान,
सत्य की रक्षा में, पत्रकार बनें मान।
1966 की स्याही, जब परिषद ने ली थी शपथ,
तब से हर साल, हम गाते हैं इस रथ।
स्वतंत्रता की हवा, बहती है हर पृष्ठ पर,
सच्चाई का दीप, जलता है हर खबर पर।
झूठ की अंधियारी, दूर होती है जब लिखते,
जनता के दिल में, आशा का दीप जलते।
प्रेस की ताकत, सवालों की बौछार,
सत्ता को झुकाते, न कोई बाधा, न कोई हार।
कलम से लिखते, हम इतिहास की नई कहानी,
हर शब्द में बंधी, देश की बंधुता की बानी।
मुक्त मीडिया, लोकतंत्र का आईना,
दिखाता है वही, जो छुपा था गलीना।
आज हम सलाम करते, उन साहसी लेखकों को,
जो डरते नहीं, सत्य लिखते हैं रोज़ को।
बदलते दौर में, तकनीक का संग,
पर नैतिकता से ही, बनता है प्रेस का रंग।
हम सब साथ मिल, बनाएं इस दिवस को,
सत्य, शांति और प्रगति का संदेश दे।
राष्ट्रीय प्रेस दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ,
कलम की शक्ति से, भारत फिर आगे बढ़े।।
- सुख मंगल सिंह,
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
वाराणसी वासी, अवध निवासी
Sukhmangal Singh
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