Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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*राष्ट्र प्रथम*

 
*राष्ट्र प्रथम*  पर एक कविता:

तिरंगा ऊंचा है, आत्मा की शान है,
राष्ट्र की एकता की पहचान है।
तीन रंगों का यह प्रतीक है,
स्वतंत्रता, समानता, और न्याय की राह है।

अशोक चक्र की चेतना है,
धर्म और न्याय की प्रतिज्ञा है।
चौबीस आरे इसकी शोभा हैं,
जीवन के चौबीस गुणों की कहानी है।

यह झंडा हमारी आन है,
हमारे राष्ट्र की शान है।
हम इसके लिए जीते हैं,
और इसके लिए मरते हैं।

राष्ट्रीय प्रथम की भावना है,
हमारे दिलों में बसती है।
यह झंडा हमारी एकता का प्रतीक है,
हमारे राष्ट्र की प्रगति की राह है।

आओ हम सब मिलकर,
इस झंडे को ऊंचा रखें।
आओ हम सब मिलकर,
राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाए रखें।

- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक 


Sukhmangal Singh

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