रामलाल की कहानी
एक छोटे से गाँव में एक बूढ़ा पिता रहता था, जिसका नाम रामलाल था। वह अपने परिवार के साथ रहता था, जिसमें उसके दो बेटे और एक बेटी थी। रामलाल एक साधारण किसान था, जो अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए खेती करता था।
रामलाल के पास एक छोटी सी जमीन थी, जो उसके परिवार का एकमात्र सहारा थी। वह अपनी जमीन से बहुत प्यार करता था और उसकी सुरक्षा के लिए हमेशा चिंतित रहता था।
एक दिन, रामलाल के बेटों ने उससे कहा कि वे शहर जाकर नौकरी करना चाहते हैं। रामलाल ने उन्हें मना किया और कहा कि वे खेती में मदद करें। लेकिन बेटे नहीं माने और शहर चले गए।
रामलाल की बेटी ने अपने पिता की चिंता को देखा और उससे कहा कि वह समझती है कि वह जमीन के लिए क्यों चिंतित है। लेकिन उसने यह भी कहा कि परिवार के लिए बच्चों की खुशी भी महत्वपूर्ण है।
रामलाल ने अपनी बेटी की बात सुनी और समझा कि वह सही थी। उसने अपने बेटों को बुलाया और उन्हें समझाया कि परिवार के लिए जमीन भी महत्वपूर्ण है, लेकिन उनकी खुशी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
इस तरह, रामलाल ने अपने परिवार के साथ मिलकर एक नया रास्ता निकाला, जिसमें जमीन की सुरक्षा और बच्चों की खुशी दोनों को महत्व दिया गया।
यह कहानी हमें सिखाती है कि परिवार में सभी के लिए प्यार और सम्मान होना चाहिए, और सभी की जरूरतों को महत्व देना चाहिए।
- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
वाराणसी
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